गुंजन’ लेखक विष्णु सैनी ‘चंचल’ का ग़ज़ल-संग्रह है, जिसमें संवेदना, अनुभव और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों का मधुर निनाद सुनाई देता है। यह संग्रह प्रेम, स्मृति, समय, संबंधों और आत्मचिंतन के भावों को शालीन ग़ज़ल परंपरा में प्रस्तुत करता है। ‘गुंजन’ की ग़ज़लें शोर नहीं करतीं, बल्कि मन के भीतर धीरे-धीरे उतरकर ठहर जाती हैं।
इस संग्रह की ग़ज़लों की विशेषता उनकी भावात्मक गहराई और भाषिक सादगी है। शेरों में न तो अनावश्यक जटिलता है और न ही बनावटी प्रदर्शन—बल्कि अनुभव की सच्चाई और एहसास की सहज अभिव्यक्ति है। विष्णु सैनी ‘चंचल’ की ग़ज़लों में शास्त्रीय अनुशासन और आधुनिक संवेदना का संतुलित मेल दिखाई देता है, जो पाठक को आत्मीयता से बाँध लेता है।
‘गुंजन’ केवल एक ग़ज़ल-संग्रह नहीं, बल्कि रचनाकार के भीतर निरंतर चलने वाले भाव-संवाद का काव्यात्मक प्रतिफल है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से पठनीय है, जो ग़ज़ल में शिल्प के साथ-साथ संवेदना की सच्ची धड़कन तलाशते हैं। हिंदी-उर्दू ग़ज़ल परंपरा में ‘गुंजन’ एक सौम्य, सुस्पष्ट और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करता है।
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GUNJAN
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& Free Shippingगुंजन’ लेखक विष्णु सैनी ‘चंचल’ का ग़ज़ल-संग्रह है, जिसमें संवेदना, अनुभव और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों का मधुर निनाद सुनाई देता है। यह संग्रह प्रेम, स्मृति, समय, संबंधों और आत्मचिंतन के भावों को शालीन ग़ज़ल परंपरा में प्रस्तुत करता है।
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