“तंजांजलि” एक सशक्त व्यंग्य-काव्य संग्रह है, जिसमें हास्य केवल मुस्कान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार करता है। यह पुस्तक उस व्यंग्य परंपरा की सशक्त कड़ी है, जहाँ शब्द हँसाते भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करते हैं।
बीना सिंह ‘मंगल’ की व्यंग्य रचनाएँ सरल भाषा में गहरे अर्थ समेटे हुए हैं। राजनीति, सामाजिक आडंबर, दोहरे मापदंड, नैतिक पतन और दैनिक जीवन की विडंबनाएँ—सब कुछ इस संग्रह में बेबाकी से उकेरा गया है। “तंजांजलि” में व्यंग्य कटु नहीं, बल्कि संवेदनशील और सार्थक है।
लेखिका परिचय
वरिष्ठ कवयित्री बीना सिंह ‘मंगल’ (मूल नाम: श्रीमती बीना देवी) का जन्म 26 नवम्बर 1971 को गाँव मोहाना, तहसील सिकन्द्राबाद, जिला बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। आपके पिता स्व. श्री जय भगवान सिंह एवं माता स्व. श्रीमती शकुंतला देवी रहे। आपके भाई स्व. जीत सिंह एवं स्व. सत्यवीर सिंह रहे। आपके जीवनसाथी वरिष्ठ साहित्यकार श्री मंगल सिंह ‘मंगल’ हैं।
आपने हाईस्कूल तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है।
साहित्यिक सक्रियता व रचनात्मक क्षेत्र
आप अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय सदस्य हैं। गृहिणी होने के साथ-साथ आप स्वतंत्र लेखन में निरंतर सक्रिय हैं।
आपकी रचनात्मक रुचि सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं साहित्यिक विषयों में रही है। आप व्यंग्य, हास्य, कविता, गीत, गीतिका, पूर्णिका, ग़ज़ल, भजन, दोहा आदि विधाओं में सृजन करती हैं तथा भजन एवं गीतों का गायन भी करती हैं।
प्रकाशन एवं मंचीय सहभागिता
आपकी रचनाएँ देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। इसके अतिरिक्त आपकी रचनाएँ लगभग दो दर्जन राष्ट्रीय स्तर के साझा काव्य-संग्रहों में प्रकाशित हैं, जिनमें पर्यावरण प्रहरी, मेरी कलम (भाग-2), नवविहान, लेखनी के स्वर, कोरोना त्रासदी, मंथन श्री, रिश्ते-नाते गुलशन में, प्रगति के दीप, काव्य प्रसंग, युग दृष्टा डॉ. किरण सिंह अभिनंदन ग्रन्थ आदि प्रमुख हैं।
आपका नियमित रूप से अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों एवं साहित्यिक संगोष्ठियों में काव्यपाठ होता रहता है।
पुरस्कार एवं सम्मान
आपको धारा काव्य रत्न अलंकरण सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान, शब्द शक्ति साहित्य सम्मान सहित अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
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TANJANJALI
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