‘मैंने सौ बार कहा है’ हिंदी काव्य मंचों के लोकप्रिय कवि विमल ग्रोवर का प्रथम काव्य-संग्रह है। यह पुस्तक भावनाओं, अनुभवों और संबंधों की उन अनकही परतों को शब्द देती है, जिन्हें मन कई बार कहता है, लेकिन ज़ुबान हर बार साथ नहीं दे पाती। इस संग्रह की कविताएँ प्रेम, संवेदना, आत्मसंवाद, जीवन की विडंबनाओं और समय के सच को सहज, प्रभावी और मंचीय ऊर्जा के साथ प्रस्तुत करती हैं।
इस कृति की विशेषता इसकी संप्रेषणीयता है। कविताएँ सीधे पाठक के मन से संवाद करती हैं—कहीं प्रश्न बनकर, कहीं स्वीकारोक्ति बनकर और कहीं आत्मीय आग्रह की तरह। विमल ग्रोवर की कविताओं में मंच का ओज भी है और काग़ज़ पर उतरने वाली भावनात्मक गहराई भी। भाषा सरल, आधुनिक और प्रवाहपूर्ण है, जो पाठक और श्रोता—दोनों को समान रूप से बाँध लेती है।
‘मैंने सौ बार कहा है’ उन बातों का काव्यात्मक दस्तावेज़ है, जो बार-बार कहे जाने के बाद भी अधूरे रह जाते हैं। यह संग्रह केवल एक कवि की पहली पुस्तक नहीं, बल्कि एक ऐसे रचनात्मक स्वर की घोषणा है, जो संवेदनशील भी है और समकालीन भी। हिंदी कविता के पाठकों और काव्य मंचों के प्रेमियों के लिए यह संग्रह निश्चय ही एक पठनीय और स्मरणीय कृति है।
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MAINE SOU BAAR KAHA HAI
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