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KAL KA SURAJ DEKHEGA

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“कल का सूरज देखेगा” समकालीन यथार्थ, संघर्ष और भविष्य की आशा को स्वर देने वाला एक सशक्त काव्य-संग्रह है। यह पुस्तक वर्तमान की चुनौतियों के बीच खड़े मनुष्य को यह विश्वास दिलाती है कि अँधेरे कितने भी गहरे क्यों न हों, अगली सुबह का सूरज उन्हें अवश्य देखेगा।

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SKU: A036 Category:

Book Details

Writer NARESH CHAND
Publisher Pankh Prakashan
Pages 80
ISBN 9789394878617
Publish Year 2025
Format Paperback
Weight (g) 200
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“कल का सूरज देखेगा” समकालीन यथार्थ, संघर्ष और भविष्य की आशा को स्वर देने वाला एक सशक्त काव्य-संग्रह है। यह पुस्तक वर्तमान की चुनौतियों के बीच खड़े मनुष्य को यह विश्वास दिलाती है कि अँधेरे कितने भी गहरे क्यों न हों, अगली सुबह का सूरज उन्हें अवश्य देखेगा।
इस संग्रह की कविताएँ और ग़ज़लें जीवन के संघर्ष, सामाजिक सरोकार, आत्मबल और सकारात्मक दृष्टि को सहज एवं प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करती हैं। यहाँ कविता केवल भावुक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि वैचारिक चेतना और समय से संवाद का माध्यम है।

लेखक परिचय
डॉ. नरेश चन्द शिक्षक एवं कवि हैं। आपका जन्म 02 जुलाई 1979 को बरहाना, बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। आपका पैतृक गाँव निसुर्खा है। आपने पीएच.डी. (हिंदी) की उपाधि प्राप्त की है।
विगत लगभग 20 वर्षों से आप शिक्षण कार्य में संलग्न हैं और वर्तमान में बालसन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, सिकंदराबाद में सहायक प्राध्यापक (हिंदी) के रूप में कार्यरत हैं।

साहित्यिक योगदान
आपके शोध-लेख, कविताएँ और ग़ज़लें देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। इसके अतिरिक्त आपने विभिन्न काव्य मंचों से काव्यपाठ कर साहित्यिक जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।

“कल का सूरज देखेगा” आपका प्रथम स्वतंत्र कविता-संग्रह है, जिसमें एक शिक्षक-कवि की संवेदनशील दृष्टि, अध्ययनशीलता और जीवनानुभव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं।

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