महाकवि डोरीलाल भास्कर जी की सृजनधारा से उपजी उनकी नवीनतम कृति “गुनगुनी धूप” अब पाठकों के लिए उपलब्ध है। जीवन की अनुभूतियों, मन की तरंगों और संवेदनाओं की नर्म ऊष्मा से भीगी यह पुस्तक पाठकों को शब्दों के उस संसार में ले जाती है जहाँ हर कविता मन के कोने कोने को छू जाती है। प्रेम, प्रकृति, जीवन-संघर्ष, आशा, आत्ममंथन और सामाजिक सरोकारों के विविध रंगों से सजी यह पुस्तक पाठक को भीतर तक स्पर्श करती है।
यह महाकवि भास्कर जी की पंख प्रकाशन से प्रकाशित पाँचवीं कृति है। इससे पूर्व प्रकाशित उनकी सभी पुस्तकों को साहित्य प्रेमियों तथा समीक्षकों से भरपूर स्नेह और सराहना प्राप्त हो चुकी है। उनकी कविता में भाषा की सहजता के साथ गूढ़ अर्थों की गहराई है, जो हर वर्ग के पाठक के हृदय में उतर जाती है।
गत मई माह में आयोजित भव्य लोकार्पण समारोह में देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विद्वानों एवं गणमान्यजनों की उपस्थिति में इस कृति का औपचारिक विमोचन संपन्न हुआ था। यह आयोजन स्वयं इस पुस्तक की गरिमा और साहित्यिक महत्व का साक्ष्य बना।
महाकवि डोरीलाल भास्कर हिंदी साहित्य की एक सशक्त, प्रखर और समर्पित साधना का नाम हैं। दशकों के लंबे साहित्यिक जीवन में उन्होंने अपने शब्दों से साहित्य को समृद्ध किया है। सरलता में गहराई, शब्दों में जीवन-दर्शन और भावों में शुद्धता उनकी विशेष पहचान है।







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