“भाव मंजरी” संवेदनाओं, अनुभूतियों और जीवन के सूक्ष्म भावों का एक सुगठित साहित्यिक पुष्पगुच्छ है। यह कृति मानवीय संवेदना के उन कोमल और गहरे पक्षों को स्वर देती है, जो प्रेम, करुणा, आत्मचिंतन, सामाजिक सरोकार और नारी मन की अनुभूतियों से उपजते हैं।
इस संग्रह की रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं—वे पाठक के मन में उतरकर ठहर जाती हैं।
अलका गुप्ता ‘भारती’ ने इस पुस्तक में छंदमुक्त के साथ-साथ दोहा, मुक्तक, गीतिका, गीत और ग़ज़ल जैसी विविध विधाओं में भावों की सशक्त अभिव्यक्ति की है। भाषा सहज, प्रवाहमयी और संवेदनशील है—जो हर आयु वर्ग के पाठकों से सहज संवाद स्थापित करती है।
लेखिका परिचय
वरिष्ठ साहित्यकार अलका गुप्ता ‘भारती’ का जन्म 13 अगस्त 1962 को शहीदों की नगरी शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) में एक क्रान्तिकारी एवं आर्य समाजी विचारधारा से जुड़े प्रतिष्ठित परिवार में हुआ।
आपके पिता श्री राजेश्वर प्रसाद गुप्ता शहर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता रहे हैं तथा माता जी आर्य समाज की विदुषी प्रवक्ता एवं समाजसेविका हैं।
आपने शाहजहाँपुर से ही प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर एम.ए. (अर्थशास्त्र), एम.ए. (हिंदी) एवं बी.एड. तक उच्च शिक्षा ग्रहण की। विवाह उपरांत आप मेरठ में अपने सहृदय जीवनसाथी श्री अनिल गुप्ता के साथ एक सुसंस्कृत गृहिणी जीवन व्यतीत करते हुए साहित्य-साधना में निरंतर सक्रिय हैं।
आपका परिवार शिक्षित एवं संस्कारी मूल्यों का प्रतिनिधि है।
साहित्यिक व सामाजिक योगदान
आप छंदमुक्त के अतिरिक्त दोहा, मुक्तक, गीतिका, गीत, ग़ज़ल, तांका, हाइकु, वर्ण पिरामिड, क्षणिका, लघुकथा, लेख एवं विचार जैसी अनेक विधाओं में असंख्य रचनाओं का सृजन कर चुकी हैं। आपकी रचनाएँ समय-समय पर देश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।
आपके रचनात्मक योगदान को अनेक साझा संकलनों में भी स्थान मिला है, जिनमें कस्तूरी कंचन, संदल सुगंध, भाव कलश, पुष्प गंधा, आदिवासी साहित्य एवं संस्कृति, पर्यावरण प्रहरी, आखर-आखर गंध-2, क्रांति रश्मियाँ, उत्तर प्रदेश के चर्चित रचनाकार, प्रज्ञानं ब्रह्म, कल्प तरु आदि प्रमुख हैं।
सम्मान एवं उपलब्धियाँ
आपको विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक मंचों से अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है, जिनमें सारस्वत सम्मान, आगमन गौरव सम्मान, प्राइड ऑफ वूमेन अवार्ड, सरस्वती सम्मान, काव्यसागर रत्न सम्मान, नारी शक्ति सम्मान तथा अखिल भारतीय साहित्य लोक एवं कवितालोक से प्राप्त सम्मान उल्लेखनीय हैं।
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& Free Shippingअलका गुप्ता ‘भारती’ ने इस पुस्तक में छंदमुक्त के साथ-साथ दोहा, मुक्तक, गीतिका, गीत और ग़ज़ल जैसी विविध विधाओं में भावों की सशक्त अभिव्यक्ति की है। भाषा सहज, प्रवाहमयी और संवेदनशील है—जो हर आयु वर्ग के पाठकों से सहज संवाद स्थापित करती है।
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