हिंदी काव्य मंचों पर वर्षों से एकछत्र राज करने वालीं सर्वाधिक लोकप्रिय कवयित्री डॉ. अनामिका जैन ‘अम्बर’ जी की बहुप्रतीक्षित कृती “अनामिका” अब पाठकों के लिए उपलब्ध है। कवयित्री अनामिका जैन जी की कविताओं और गीतों के चाहने वाले बड़ी संख्या में मौजूद हैं। बहुत से प्रशंसक ऐसे हैं जिन्हें अनामिका जी के तमाम गीत, कविताएं और मुक्तक कंठस्थ हैं लेकिन इस पुस्तक में अनामिका जी की लोकप्रिय गीतों, कविताओं, मुक्तकों और ग़ज़लों के अलावा कई अनसुनी रचनाएँ भी हैं जो बेहद खूबसूरत हैं तथा जिन्हें पढ़कर आप वाह किया बिना नही रह पाएंगे।।वर्षों की काव्य साधना को हिंदी पाठकों तक एक पुस्तक के रूप में पहुँचाने का कार्य अनामिका जी ने बेहद कुशलता से किया है। इसके लिए अनामिका जी वाकई बधाई की पात्र हैं। अक्सर लोगों को शिकायत रहती है कि मंच के कवि/कवयित्री साहित्यिक रचनाएँ नही लिखते लेकिन इस पुस्तक को पढ़ने के बाद उन लोंगों के सभी भ्रम दूर हो जाएँगे।।
पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, शैलेश लोढ़ा जैसे देश के बड़े कवियों के लेखों ने पुस्तक में चार चाँद लगा दिए हैं।
103 पृष्ठों की यह पुस्तक बेहद खूबसूरत तथा पठनीय है।
पुस्तक का संपादन प्रसिद्ध साहित्यकार कुमार पंकज जी ने किया है।









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