“आदमखोर परिंदा” – यह नाम ही अपने आप में एक रहस्य, रोमांच और कल्पना की उड़ान का संकेत देता है। डॉ. नरेंद्र त्यागी ‘नीर’ द्वारा रचित एवं पंख प्रकाशन से प्रकाशित उनकी यह चौथी कृति, उनके लेखन के अनुभव और कल्पनाशक्ति का अद्भुत संगम है। पंख प्रकाशन से प्रकाशित यह कहानी-संग्रह उन पाठकों के लिए एक अनमोल भेंट है जो साहित्य में नवीनता, विविधता और मनोरंजन की तलाश करते हैं।
इस संग्रह की हर कहानी एक नई दुनिया में ले जाती है – कहीं डर से सिहरन होती है, तो कहीं मानवीय संवेदनाओं की गहराई छू जाती है। लेखक की लेखनी इतनी सजीव है कि पाठक पात्रों के साथ हँसता, रोता और रोमांचित होता है। कथानक इतने प्रवाहपूर्ण हैं कि एक बार पुस्तक हाथ में ली जाए, तो बिना पूरा पढ़े रख पाना कठिन हो जाता है।
“आदमखोर परिंदा” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि अनुभवों की श्रृंखला है, जिसमें रहस्य, रोमांच, और गूढ़ भावनाओं की परतें पाठकों के मन में गहराई से उतरती हैं। यह पुस्तक न केवल पढ़ने का आनंद देती है, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करती है।
हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक संग्रहणीय रचना है। तो इसे जरूर पढ़ें, क्योंकि हर कहानी के पंख होते हैं – और ये पंख आपको ले चलेंगे कल्पना की उस उड़ान पर, जहाँ साहित्य जीवंत होता है।







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