“अब नहीं होता” आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार में थक चुके मन की कविताई है—जहाँ अनुभव, रिश्ते और संवेदनाएँ शब्दों में ढलकर आत्मस्वीकार का रूप ले लेती हैं। यह काव्य-संग्रह उस क्षण को पकड़ता है, जब व्यक्ति बहुत कुछ सहने, समझने और निभाने के बाद स्वयं से कहता है—अब नहीं होता।
इस संग्रह की कविताएँ जीवन के यथार्थ, बदलते रिश्तों, भीतर के द्वंद्व और मानवीय भावनाओं को सहज, सधी और प्रभावशाली भाषा में व्यक्त करती हैं। यहाँ कविता केवल भावुकता नहीं, बल्कि अनुभव से उपजा संतुलन है—जो पाठक को अपने ही जीवन की परतों से रू-ब-रू कराता है।
लेखक परिचय
शुभ रत्न का जन्म 01 अगस्त 1968 को देश की राजधानी दिल्ली में हुआ। आपके पिता स्व. डॉ. योगेश कल्याण एवं माता स्व. श्रीमती सुमित्रा देवी ने संस्कार, शिक्षा और संवेदनशीलता की जो सुदृढ़ नींव रखी, वही आपके साहित्यिक व्यक्तित्व का आधार बनी।
आपने सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा भारत के प्रतिष्ठित संस्थान बिट्स पिलानी से प्राप्त की। पेशे से आप एक सफल प्रबंधक हैं और वर्तमान में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। परंतु प्रशासनिक जिम्मेदारियों के समानांतर आपके भीतर का रचनाकार निरंतर शब्दों की खोज में रहता है।
साहित्यिक दृष्टि
कविता लेखन आपके आत्म-अभिव्यक्ति का सबसे गहन माध्यम है। आपकी कविताओं में आधुनिक जीवन की गति, संबंधों की जटिलता और मानवीय संवेदनाओं की गहराई सहज रूप से प्रतिबिंबित होती है। आपके लिए शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुभवों और संवेदनाओं के बीच सेतु हैं।
परिवार और प्रेरणा
आपकी साहित्यिक यात्रा में परिवार का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। आपके भाई श्री सुधीर एवं श्री सुबोध, पत्नी श्रीमती अल्पना, भाभियाँ श्रीमती शशि एवं श्रीमती अनीता, पुत्र सिद्धार्थ, शिखर और ऋषभ, तथा पुत्रियाँ मिताली, शीना और मेघना—सभी ने आपके रचनात्मक जीवन को निरंतर प्रोत्साहन और प्रेरणा प्रदान की है। आपकी जीवनसंगिनी श्रीमती अल्पना इस यात्रा में एक सशक्त सहयात्री के रूप में सदैव आपके साथ खड़ी रही हैं।
“अब नहीं होता” आपकी प्रथम प्रकाशित काव्य-कृति है, जो परिपक्व अनुभवों और संवेदनशील दृष्टि का सार प्रस्तुत करती है।







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