“अब नहीं कुछ शेष मुझमें” एक आत्मचिंतन से उपजा हुआ काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन की संचित अनुभूतियाँ, स्मृतियाँ और अनुभव शब्दों का रूप लेकर सामने आते हैं। यह संग्रह उस मनःस्थिति की अभिव्यक्ति है, जहाँ व्यक्ति संसार को बहुत देख-समझ लेने के बाद अपने भीतर झाँकता है और स्वयं से संवाद करता है।
इस कृति की कविताएँ जीवन के यथार्थ, सामाजिक अनुभव, आर्थिक दृष्टि और मानवीय संवेदनाओं को सरल, सधी हुई और परिपक्व भाषा में प्रस्तुत करती हैं। यहाँ कोई बनावट नहीं—केवल जीवन से उपजा सत्य है, जो पाठक के मन को सहजता से छू लेता है।
लेखक परिचय
बृज मोहन शर्मा का जन्म सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे स्व. श्री दीप चंद शर्मा एवं स्व. श्रीमती सोमी देवी के सुपुत्र हैं। प्रारंभिक जीवन से ही अध्ययन के प्रति गंभीर रुझान रखने वाले लेखक ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की।
शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और अनुशासन की भावना ने उन्हें भारतीय स्टेट बैंक में सेवा हेतु प्रेरित किया, जहाँ उन्होंने दीर्घकाल तक कार्य करते हुए उच्च नैतिक मूल्यों और समर्पण का परिचय दिया। सेवानिवृत्ति के उपरांत साहित्य की ओर उनका रुझान और अधिक प्रबल हुआ।
साहित्यिक यात्रा
स्वतंत्र लेखक के रूप में “अब नहीं कुछ शेष मुझमें” आपकी प्रथम प्रकाशित कृति है। समाज, संस्कृति, आर्थिक विचारों तथा मानवीय संवेदनाओं से गहरा जुड़ाव आपके लेखन को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। आपकी कविताएँ अनुभूति प्रधान हैं और पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।
वर्तमान जीवन
सहारनपुर में निवास करते हुए आप नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। वर्तमान में आपका निवास न्यू माधवनगर, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में है।
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AB NAHI KUCH SHESH MUJHME
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