मेरठ शहर की वरिष्ठ कवयित्री एवं सहित्यकरा आदरणीय रेखा गिरीश जी का नवीनतम काव्य-संग्रह “काश! ख़ुद को देख पाते” पंख प्रकाशन से प्रकाशित होकर आ चुका है।
वरिष्ठ कवयित्री एवं साहित्यकारा श्रीमती रेखा गिरीश अत्यंत सौम्य, शालीन और संवेदनशील प्रकृति की कवयित्राी हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रकृति, आध्यात्मिक चिंतन, राष्ट्र-प्रेम, शिक्षा और प्रगतिशीलता पूर्ण संदेशों को बख़ूबी प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा सरल, परिमार्जित, संस्कृतनिष्ठ और सरल बोध्गम्य है, जिसका प्रभाव सहज ही पाठक के हृदय पर अंकित हो जाता है।
इस संकलन में रेखा जी के गीत, गीतिका, छन्द, मुत्तफक आदि सभी विधाओं का संकलन है, जो उनकी शब्द और कला की शक्ति से पाठकों को परिचय कराता है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि कवयित्राी श्रीमती रेखा गिरीश के इस काव्य-संकलन में साहित्य की सभी विधओं का सम्मिश्रण है, जिसमें गीत, ग़ज़ल, दोहा, कुंडली, कविता आदि का समावेश है।
पुस्तक पूरी तरह से कलरफुल है तथा हार्डकवर में उपलब्ध है।







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