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TU PARINDA HAI GAGAN KA

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यह पुस्तक केवल एक गीतिका संग्रह मात्र नहीं, बल्कि जीवन के अनगिनत रंगों और अनकहे अहसासों की कहानी है। पुस्तक की हर रचना आत्मा को छूने वाली है, जो पाठकों को अपनी गहराइयों में समेट लेती है और एक नई दुनिया से परिचित कराती है।

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SKU: A027 Category:

Book Details

Writer ALKA GUPTA BHARTI
Publisher Pankh Prakashan
Pages 104
ISBN 9789394878624
Publish Year 2024
Format Paperback
Weight (g) 200
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कविताएं केवल शब्द नहीं होतीं, वे भावनाओं की जीवंत तस्वीर होती हैं, जो हमारे दिलों की गहराइयों तक पहुंचती हैं। ऐसी ही भावनात्मक गहराई और प्रेरणा का संगम है श्रीमती अलका गुप्ता ‘भारती’ का अद्वितीय गीतिका संग्रह ‘तू परिंदा है गगन का’।

यह पुस्तक केवल एक गीतिका संग्रह मात्र नहीं, बल्कि जीवन के अनगिनत रंगों और अनकहे अहसासों की कहानी है। लेखिका की हर रचना आत्मा को छूने वाली है, जो पाठकों को अपनी गहराइयों में समेट लेती है और एक नई दुनिया से परिचित कराती है।

श्रीमती अलका गुप्ता ‘भारती’ की रचनाएं केवल शब्दों का संयोजन नहीं हैं, बल्कि उनके भीतर छिपी सादगी और गहराई पाठकों को भावनाओं के अनोखे संसार में ले जाती है। उनके शब्द जीवन के हर पहलू को इतने सुंदर तरीके से उकेरते हैं कि पाठक खुद को उन रचनाओं का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।

पुस्तक क्यों पढ़ें?

जीवन का उत्सव: यह संग्रह जीवन, प्रेम, संघर्ष, और सपनों जैसे विषयों पर आधारित है, जो पाठकों को जीने की नई प्रेरणा देते हैं।

भावनाओं का संगम: हर गीतिका (ग़ज़ल) दिल को छूने वाली है और आत्मा को प्रेरित करती है।

सरल भाषा, गहरी अनुभूति: लेखिका की शैली इतनी प्रभावी है कि हर वर्ग का पाठक इससे जुड़ाव महसूस करता है।

यदि आप जीवन के संघर्षों से जूझते हुए एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता चाहते हैं, तो ‘तू परिंदा है गगन का’ आपके लिए एक आदर्श साथी है। यह संग्रह आपको सिखाएगा कि कैसे अपने सपनों के पंख फैलाकर अनंत आकाश की ऊंचाईयों को छू सकते हैं।

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