Sale!

ANATH

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

& Free Shipping

“अनाथ” एक ऐसी मार्मिक कथा है जो आपके मन की परतों को छू जाती है और यह सवाल छोड़ जाती है — क्या वाकई हम एक सभ्य, संवेदनशील समाज का हिस्सा हैं?

- +
SKU: A025 Categories: ,

Book Details

Writer SUMANT PANDEY
Publisher Pankh Prakashan
Pages 80
ISBN 9789394878563
Publish Year 2025
Format Paperback
Weight (g) 200
Guaranteed Safe Checkout

हमारे समाज की अनदेखी सच्चाइयों को उजागर करती, भावनाओं की गहराइयों में डुबकी लगाती, और इंसानियत के मायनों को नए सिरे से परिभाषित करती — लेखक सुमंत पांडेय का नवीनतम लघु उपन्यास “अनाथ” अब आपके समक्ष है।

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है — यह उन गुमनाम चेहरों की चीख है, जिन्हें हम अक्सर राह चलते अनदेखा कर देते हैं। “अनाथ” एक ऐसी मार्मिक कथा है जो आपके मन की परतों को छू जाती है और यह सवाल छोड़ जाती है — क्या वाकई हम एक सभ्य, संवेदनशील समाज का हिस्सा हैं?

कहानी का केंद्र है — लड्डू।
एक मासूम बच्चा, जिसकी आँखों में भी सपने थे, पर किस्मत ने उन्हें बहुत पहले ही छीन लिया। माता-पिता की मौत के बाद लड्डू इस दुनिया में पूरी तरह अकेला रह गया — न कोई सर पर हाथ रखने वाला, न कोई पुकार सुनने वाला। दर-दर की ठोकरें, भूख, तिरस्कार और समाज की बेरुखी उसकी दिनचर्या बन गई।

लेकिन “अनाथ” सिर्फ अंधेरे की कहानी नहीं है — यह रोशनी की एक छोटी-सी किरण की भी बात करती है, जो लड्डू की ज़िंदगी में अचानक प्रकट होती है। कुछ ऐसे अनजान लोग, जो आज भी इंसानियत की लौ जलाए हुए हैं, लड्डू की कहानी में एक नया मोड़ लाते हैं।

यह जानना बेहद दिलचस्प है कि कैसे यह छोटा-सा बच्चा, जिसकी किस्मत ने उससे सब कुछ छीन लिया था, अपने भीतर की उम्मीद और दूसरों के छोटे-छोटे सहारों के बल पर आगे बढ़ता है। लड्डू की यात्रा सिर्फ उसके नहीं, बल्कि हर उस इंसान की प्रतीक है जो संघर्षों के बीच भी जीना नहीं छोड़ता।

लेखक परिचय:
बिहार की सांस्कृतिक मिट्टी में पले-बढ़े सुमंत पांडेय आज मुंबई के साहित्यिक और सिने जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। एक संवेदनशील लेखक और कुशल पटकथा-लेखक के रूप में उन्होंने हमेशा उन विषयों को चुना है, जो समाज की परछाइयों में छिपे रहते हैं।
उनकी रचनाओं में गाँव की सौंधी खुशबू, लोकसंस्कृति की आत्मा, और महानगर की भागती ज़िंदगी की ठोकरें — तीनों का ऐसा जीवंत मिश्रण मिलता है जो पाठक को बाँध लेता है।

उनकी पहली कृति “हार करो स्वीकार नहीं” एक खंड काव्य थी जिसने संघर्ष के बीच आशा की लौ को दर्शाया। अब “अनाथ” उस संघर्ष को ज़्यादा करीब से, ज़्यादा तीव्रता से छूता है — एक अनाथ बालक की नज़र से दुनिया को देखने का प्रयास है यह।

यदि आप उन कहानियों को पढ़ना चाहते हैं जो सिर्फ कहानियाँ नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार हैं — तो “अनाथ” आपके लिए है।
इसे पढ़िए, महसूस कीजिए, और एक बार फिर से अपने भीतर के इंसान को जगाइए। शायद लड्डू की कहानी आपके दिल में वो खिड़की खोल दे जिसे आप भूल चुके हैं — करुणा की, अपनत्व की, और सच्ची इंसानियत की।

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

ANATHANATH
Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.
- +
Scroll to Top