वरिष्ठ कवयित्री, संवेदनशील रचनाकार और जनवादी चेतना की सशक्त हस्ताक्षर लेखिका बीना सिंह मंगल जी की नवीनतम काव्य-कृति “कृतिकञ्जली” समकालीन हिंदी साहित्य को एक नई गरिमा प्रदान करती है। यह संग्रह न केवल उनकी अब तक की लेखन-यात्रा की परिपक्वता का प्रमाण है, बल्कि साहित्य में नव-गद्य काव्य की एक नवीन और प्रभावशाली शैली का अनुपम उदाहरण भी है।
“कृतिकञ्जली” लेखिका की तीसरी प्रकाशित पुस्तक है, जो पंख प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। इससे पूर्व उनकी चर्चित कृतियाँ “छत पर खेती” और “तंजानजली” ने भी साहित्यिक जगत में विशेष स्थान प्राप्त किया। परंतु कृतिकञ्जली इन सब से अलग है—यह एक ऐसा संग्रह है, जिसमें भाव, संवेदना और विचार की त्रिवेणी बहती है। इस पुस्तक की प्रत्येक रचना पाठकों को भीतर तक स्पर्श करती है, एक नया दृष्टिकोण देती है और समय, समाज तथा स्त्री-मन के सूक्ष्म आयामों को उजागर करती है।
भव्य लोकार्पण समारोह में इस पुस्तक ने साहित्यिक समुदाय का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया था। अपने नवीन शिल्प, विषय-वस्तु और प्रस्तुति के कारण कृतिकञ्जली ने विमर्श के नए द्वार खोले हैं। यह केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण की यात्रा है।







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