“दर्द-ए-बयाँ” अनुभूतियों, संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ का ऐसा काव्यात्मक दस्तावेज़ है, जिसमें पीड़ा केवल आँसू नहीं बनती, बल्कि शब्दों के माध्यम से चेतना का स्वर ग्रहण करती है। यह पुस्तक उन अनकहे भावों की आवाज़ है, जो आम जनजीवन में रोज़ जन्म लेते हैं, पर अक्सर अभिव्यक्ति नहीं पा पाते।मंगल सिंह ‘मंगल’ की कविताएँ, ग़ज़लें और गीत जीवन के यथार्थ से उपजी हैं—जहाँ व्यक्तिगत पीड़ा, सामाजिक विसंगतियाँ, प्रेम, करुणा और व्यंग्य एक साथ चलते हैं। “दर्द-ए-बयाँ” पाठक को केवल पढ़ने का अनुभव नहीं देती, बल्कि भीतर तक महसूस करवाती है।
लेखक परिचय
वरिष्ठ साहित्यकार मंगल सिंह ‘मंगल’ का जन्म 01 जनवरी 1960 को गाँव आँजनी, जिला बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। आपके पिता स्व. श्री सरमन सिंह एवं माता स्व. श्रीमती भाग्यवती देवी रहे। आपकी धर्मपत्नी श्रीमती बीना सिंह ‘मंगल’ हैं।आपने स्नातक तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त की और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों को अपनी रचनात्मक शक्ति का आधार बनाया।
साहित्यिक विधाएँ व रचनात्मक विस्तार
आप कविता, गीत, ग़ज़ल, व्यंग्य, दोहा, क्षणिकाएँ, हाइकू, फाड़कू मुक्तिका, टप्पे, कुण्डलिया जैसी विविध विधाओं में समान दक्षता से सृजन करते हैं। यह बहुआयामी लेखन ही आपकी विशिष्ट पहचान है।
प्रकाशन एवं साहित्यिक सहभागिता
आप उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होकर वर्तमान में स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा साझा संकलनों में प्रकाशित होती रही हैं। साथ ही, आपने अनेक कवि सम्मेलनों, काव्य-गोष्ठियों एवं साहित्यिक आयोजनों में काव्यपाठ कर श्रोताओं से सीधा संवाद स्थापित किया है।
लेखक की अन्य (प्रकाशाधीन) कृतियाँ
दर्द-ए-दिल, मुक्तिकांजलि, धर्मांजलि, महामारियाँ, सतरंगी, हमराही, काव्यांजलि, वृक्षोपकारांजलि, देश के दो पथ (काव्य-संग्रह), विश्व धरोहर, देश की धरोहर, विश्व के अजूबे, मंगल दोहावली, व्यंग्यांजलि, अवधपुरी (प्रबन्ध-काव्य), चिनतनांजलि आदि।




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