महाकवि डोरी लाल भास्कर हिंदी काव्य-जगत का एक प्रतिष्ठित और आदरणीय नाम हैं, जिनकी रचनाएँ न केवल भावों की गहराई को छूती हैं, अपितु जीवन की विविध अनुभूतियों को भी शब्दों में पिरोकर साहित्य को एक विशिष्ट ऊँचाई प्रदान करती हैं।
उनकी नवीनतम काव्य-कृति “आख़री सफ़र” एक भाव-प्रधान गीतिका संग्रह है, जो पाठकों को आत्मा की गहराइयों तक स्पर्श करता है। इस संग्रह में जीवन के उत्तरार्ध की अनुभूतियाँ, स्मृतियों की सिहरन, और आत्मबोध की पराकाष्ठा झलकती है।
यह संग्रह न केवल कवि की अनुभूतियों का प्रतिबिंब है, बल्कि उनकी परिपक्व चेतना और कलम की सधनता का सशक्त प्रमाण भी है। जीवन के अंतिम चरण में भी महाकवि की लेखनी जिस प्रकार जीवन, मृत्यु, स्मृति और आशा को गहनता से प्रस्तुत करती है, वह निःसंदेह सराहनीय और प्रेरणास्पद है।
अब तक महाकवि भास्कर जी की लगभग 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें साहित्य जगत में अपार प्रशंसा प्राप्त हुई है। पंख प्रकाशन से उनकी 5 कृतियाँ प्रकाशित होकर पाठकों तक पहुँच चुकी हैं। उनकी रचनात्मक ऊर्जा आज भी उसी निष्ठा और संवेदनशीलता से प्रवाहित हो रही है, जैसे उनकी आरंभिक कृतियों में दिखती थी।
“आख़री सफ़र” एक संग्रह मात्र नहीं, बल्कि एक साहित्यिक यात्रा है, अनुभूतियों की, आत्ममंथन की, और जीवन के अंतिम सोपानों की मधुर गाथा की।




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